मौलिक कर्तव्य (अनुच्छेद 51A) | Fundamental Duties Notes

मौलिक कर्तव्य (अनुच्छेद 51A) की संपूर्ण जानकारी सरल हिंदी में। UPSC, SSC, State PCS व अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उपयोगी Indian Polity Notes।
मौलिक कर्तव्य (अनुच्छेद 51A) | Fundamental Duties Notes
मौलिक कर्तव्य (अनुच्छेद 51A): संपूर्ण अध्ययन भारतीय संविधान न केवल नागरिकों को अधिकार प्रदान करता है, बल्कि उनसे कुछ कर्तव्यों की अपेक्षा भी करता है। इन्हीं कर्तव्यों को मौलिक कर्तव्य (Fundamental Duties) कहा जाता है, जिनका उल्लेख अनुच्छेद 51A में किया गया है। यह विषय UPSC, SSC, State PCS, Railway, Defence जैसी सभी प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। मौलिक कर्तव्य क्या हैं? मौलिक कर्तव्य वे नैतिक और संवैधानिक दायित्व हैं, जिनका पालन प्रत्येक भारतीय नागरिक को करना चाहिए। ये कर्तव्य नागरिकों को यह स्मरण कराते हैं कि केवल अधिकारों की माँग करना ही नहीं, बल्कि राष्ट्र और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाना भी आवश्यक है। मौलिक कर्तव्य न्यायालय द्वारा सीधे प्रवर्तनीय नहीं हैं, लेकिन इनका सामाजिक और नैतिक महत्व अत्यधिक है। मौलिक कर्तव्यों का ऐतिहासिक विकास मूल संविधान (1950) में मौलिक कर्तव्यों का उल्लेख नहीं था। 1976 में 42वाँ संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा 10 मौलिक कर्तव्यों को जोड़ा गया। 2002 में 86वाँ संविधान संशोधन द्वारा एक नया कर्तव्य जोड़ा गया। वर्तमान में कुल 11 मौलिक कर्तव्य ह…