ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद का सरल अध्ययन – Ancient India History notes for SSC, UPSC, State exams.
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वेद : प्राचीन भारत के इतिहास के प्रमुख स्रोत
प्राचीन भारतीय इतिहास को समझने के लिए हमें जिन स्रोतों से जानकारी मिलती है, उनमें वेदों का स्थान सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। भारतीय इतिहास के अध्ययन में स्रोतों को मुख्यतः चार वर्गों में बाँटा गया है प्राचीन भारतीय इतिहास के स्रोत धर्मग्रंथ ऐतिहासिक ग्रंथ विदेशियों के विवरण पुरातत्व संबंधी साक्ष्य इन सभी में धर्मग्रंथ एवं ऐतिहासिक ग्रंथ प्राचीन भारत की संस्कृति, समाज, राजनीति और धार्मिक जीवन की विस्तृत जानकारी प्रदान करते हैं। वेदों का परिचय भारत का सर्वप्राचीन ग्रंथ वेद माने जाते हैं। वेदों के संकलनकर्ता के रूप में महर्षि कृष्ण द्वैपायन वेदव्यास को स्वीकार किया जाता है। भारतीय परंपरा के अनुसार वेद नित्य एवं अपौरुषेय हैं, अर्थात् इन्हें मानव द्वारा रचित नहीं माना जाता।
वेदों में “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना निहित है, जो सम्पूर्ण मानवता को एक परिवार मानने का संदेश देती है। वेदों की संख्या वेद कुल चार हैं— ऋग्वेद यजुर्वेद सामवेद अथर्ववेद ऋग्वेद ऋग्वेद को ऋचाओं का क्रमबद्ध संग्रह कहा जाता है। यह वेद वैदिक कालीन समाज की राजनीतिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थिति को समझने का प्रमुख स्रोत है। ऋग्वेद से संबंध…